आम औरतों की तरह, खुद को संवारना नहीं जानती थी। आम औरतों की तरह, खुद को संवारना नहीं जानती थी।
और इस महामारी को रोकने के लिए, सोशल डिस्टन्सिंग भी जरुरी है। और इस महामारी को रोकने के लिए, सोशल डिस्टन्सिंग भी जरुरी है।
और हिम्मत के साथ इस परिस्थिति का मुकाबला करना चाहिए। और हिम्मत के साथ इस परिस्थिति का मुकाबला करना चाहिए।
बचपन मैं हम कई तरह के खेल खेलते हैँ। बचपन मैं हम कई तरह के खेल खेलते हैँ।
हमे जहान में अपने ही देते हैं,जख़्म गैरों के जहान में भले होते हैं,बुरे कर्म। हमे जहान में अपने ही देते हैं,जख़्म गैरों के जहान में भले होते हैं,बुरे कर्म।
औरत की बेवफाई पर हज़ार सवाल उठते है क्या कभी किसी ने पुरुष के चरित्र को देखा। औरत की बेवफाई पर हज़ार सवाल उठते है क्या कभी किसी ने पुरुष के चरित्र को देखा।